Harivansh Rai Bachchan

12:04 AM Edit This 0 Comments »



"नाम अगर कोई पूछे तो, कहना बस पीनेवाला
काम धालाना, और धालाना सब्को मदिरा क प्याला
जाति प्रीये, जाति प्रीये पूछे यदि कोई,
कह देना दीवानों की
धर्म बताना प्यालों की ले माला जपना मधुशाला"
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"नीड़ का निर्माण फिर फिर
नेह का आह्वान फिर फिर
वो उठी आंधी की नभ में
छा गया सहसा अँधेरा
धुली धूसरित बादलों ने
भूमि को इस भाँति घेरा
रात सा दिन हो गया फिर
रात आई और काली
लग रहा था अब न होगा
इस निशा का फिर सवेरा...
रात के उत्पात भय से
भीत जन जन
भीत कण कण
किन्तु प्राची से उषा की
मोहिनी मुस्कान फिर फिर
नीड़ का निर्माण फिर फिर
नेह का आह्वान फिर फिर"

ग्रेस

9:55 PM Edit This 0 Comments »
संदिग्ध घरांच्या ओळी
आकाश ढवळतो वारा
माझ्याच किणाऱ्या वरती
लाटांचा आज पहारा..
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देखणा कबीर


दिशावेगाल्या नभांची
गेली तुटून कमान
तुझ्या व्रतस्थ दू:खाचे
तरी सरे ना ईमान

जन्म संपले तलाशी
आणि पुसल्या मी खुणा
तरी वाटांच्या नशीबी
तुझ्या पायांच्या यातना

भोळ्या प्रतिद्न्या शब्दांच्या
गेली अर्थालाही चिर
कांचा वेगळ्या पा-यात
तरी देखणा कबीर !! -ग्रेस


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मंदिरे सुनी सुनी

मंदिरे सुनी सुनी
कुठे न दीप काजवा
मेघवाहि श्रावणात
ये सुगंधी गारवा

रात्र सुर पेरुनी
अशी हळू हळू भरे
समोरच्या धुक्यातली
उठून चालली घरे

गळ्यात शब्द गोठले
अशांतता दिसे घनी
दु:ख बांधुनी असे
क्षितीज झाकिले कुणी?

एकदाच व्याकुळा
प्रतिध्वनित हाक दे
देह कोसळून हा
नदीत मुक्त वाहु दे..
- ग्रेस

R A I N M A K E R

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